
समय रहते रुका बाल विवाह, प्रशासन की पहल से नाबालिग बेटी का विवाह टला
चैनपुर प्रखंड के मझुई गांव का मामला, जांच में बालिका की उम्र 15 वर्ष 6 माह पाई गई; पिता ने लिखित आश्वासन दिया कि बालिग होने के बाद ही करेंगे विवाहभभुआ/चैनपुर (कैमूर), 1 जुलाई 2026:कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत मझुई गांव में एक संभावित बाल विवाह को प्रशासन ने समय रहते रोक दिया। बाल विवाह से संबंधित प्राप्त शिकायत के आधार पर प्रखंड प्रशासन ने तत्काल जांच कराई, जिसमें संबंधित बालिका की उम्र निर्धारित वैवाहिक आयु से कम पाई गई। इसके बाद अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए समझाया, जिसके बाद बालिका के पिता ने लिखित रूप से आश्वासन दिया कि वह अपनी बेटी का विवाह बालिग होने से पहले नहीं करेंगे।प्राप्त जानकारी के अनुसार, केस संख्या
BR/CH/20261440179 दिनांक 30 जून 2026 के तहत ग्राम मझुई, थाना चैनपुर निवासी अंजली कुमारी, पिता शारदा सिंह के संभावित बाल विवाह की सूचना प्रशासन को मिली थी। इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी-सह-बाल विवाह निषेध पदाधिकारी के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, चैनपुर द्वारा मामले की जांच प्रखंड कल्याण पदाधिकारी से कराई गई।जांच के दौरान प्रस्तुत शैक्षणिक प्रमाण-पत्र (मार्कशीट) के अनुसार अंजली कुमारी की जन्मतिथि 1 जनवरी 2011 पाई गई।
इस आधार पर उसकी वर्तमान आयु लगभग 15 वर्ष 6 माह निर्धारित हुई, जो कानूनी विवाह योग्य आयु से कम है।जांच में यह भी सामने आया कि परिजनों द्वारा बालिका का विवाह तय किया गया था। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने बालिका के पिता शारदा सिंह को बाल विवाह के दुष्परिणामों एवं कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। समझाइश के बाद उन्होंने लिखित रूप से प्रशासन को आश्वस्त किया कि वह अपनी बेटी का विवाह बालिग होने से पहले नहीं करेंगे तथा कानून का पालन करते हुए उचित आयु पूरी होने के बाद ही विवाह संपन्न कराएंगे।प्रखंड विकास पदाधिकारी, चैनपुर ने इस संबंध में जांच प्रतिवेदन एवं पिता द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन की प्रति अनुमंडल पदाधिकारी-सह-बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, भभुआ को भेज दी है।प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने में सहयोग करें। यदि कहीं भी नाबालिग लड़के या लड़की के विवाह की सूचना मिले तो तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों अथवा पुलिस को इसकी जानकारी दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
