डेढ़ किलोमीटर दूर स्कूल, रास्ता बदहाल… बच्चों के लिए मंदिर ही बना सहारा!

चीताडी गांव में स्कूल नहीं, मंदिर के बरामदे में पढ़ने को मजबूर बच्चेडेढ़ किलोमीटर दूर विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता भी नहीं, ग्रामीणों ने गांव में स्कूल भवन निर्माण की उठाई मांग

चैनपुर (कैमूर)। चैनपुर प्रखंड अंतर्गत मझुई पंचायत के चीताडी गांव में विद्यालय की सुविधा नहीं होने के कारण छोटे-छोटे बच्चे मंदिर के बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सरकारी स्तर पर विद्यालय की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित विद्यालय तक पहुंचने के लिए भी समुचित रास्ता नहीं है। ऐसे में बच्चों को खेतों की पगडंडियों से होकर विद्यालय जाना पड़ता है।ग्रामीण रामदहिन और छोटे लाल ने बताया कि चीताडी मौजा में एक विद्यालय जरूर है, लेकिन वह गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है।

विद्यालय तक पहुंचने के लिए अब तक बेहतर सड़क या रास्ते की व्यवस्था नहीं हो सकी है। बच्चे और शिक्षक खेतों के बीच बनी पगडंडी के सहारे विद्यालय पहुंचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से इस समस्या के बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की गई है।ग्रामीणों के अनुसार चीताडी गांव में रहने वाले अधिकांश बच्चे छोटे हैं। इतनी कम उम्र में बच्चों के लिए रोजाना डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करना परेशानी का कारण बन रहा है। इसके अलावा मुख्य ग्रामीण रास्ते पर वाहनों का आवागमन भी अधिक रहता है, जिससे अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।

ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों को अकेले इतनी दूर स्कूल भेजना जोखिम भरा है।मंदिर के बरामदे में चल रही पढ़ाईविद्यालय की सुविधा नहीं होने के कारण गांव के बच्चों को मंदिर के बरामदे में पढ़ाई करनी पड़ रही है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन विद्यालय भवन के अभाव में उन्हें मजबूरी में वैकल्पिक स्थान पर पढ़ना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सरकारी भूमि उपलब्ध है। यदि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पहल करे तो इसी सरकारी भूमि पर विद्यालय भवन का निर्माण कराया जा सकता है। इससे गांव के छोटे बच्चों को घर के नजदीक शिक्षा की सुविधा मिल सकेगी और अभिभावकों की सुरक्षा संबंधी चिंता भी दूर होगी।सरकारी भूमि पर स्कूल भवन बनाने की मांगचीताडी गांव के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले का संज्ञान लेते हुए गांव में विद्यालय भवन निर्माण कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद यदि वहां विद्यालय का निर्माण कराया जाता है तो गांव के बच्चों को शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थल का निरीक्षण कराकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव में स्कूल की व्यवस्था होने से न केवल बच्चों की शिक्षा सुगम होगी, बल्कि छोटे बच्चों के अभिभावकों को भी राहत मिलेगी।अब देखना यह है कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या पर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन कब तक संज्ञान लेते हैं और चीताडी गांव के बच्चों को अपने गांव में ही विद्यालय की सुविधा मिल पाती है।

( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)

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