
फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध, मंत्री जमा खान ने उठाई बिहार के जल अधिकार की आवाज
फरक्का जल संधि के नवीनीकरण के खिलाफ जदयू, बिहार के हक की उठाई आवाज‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ के जरिए गंगा किनारे बसे 12 जिलों में जनजागरूकता अभियान, भभुआ में प्रेसवार्ता कर नेताओं ने रखी पार्टी की मांग
भभुआ/कैमूर। फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर जनता दल (यू) ने बिहार के हितों से जुड़ा सवाल उठाते हुए इसके नवीनीकरण का विरोध किया है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय भभुआ में जदयू की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी नेताओं ने कहा कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि के प्रभावों पर बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार की आवश्यकता है।प्रेसवार्ता में ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की जानकारी देते हुए नेताओं ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों के लोगों को फरक्का बराज और जल संधि के संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है, जिसका समापन कटिहार में होगा।बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की मांगअल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान ने कहा कि जदयू का मानना है कि वर्ष 1996 की फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार में किसानों की सिंचाई, पेयजल, उद्योग, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों की जल आवश्यकताओं को देखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।पार्टी नेताओं के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भी फरक्का जल संधि का मुद्दा उठाया और इसके नवीनीकरण के दौरान बिहार की वर्तमान एवं भविष्य की जल आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की मांग की।
गंगा में गाद और बाढ़ का भी उठाया मुद्दाजदयू नेताओं ने फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने और नदी तल के ऊंचे होने को उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या से जोड़ते हुए सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि एक ओर बारिश के मौसम में बाढ़ की समस्या गंभीर होती है, वहीं शुष्क मौसम में पानी की उपलब्धता को लेकर कई क्षेत्रों में संकट की स्थिति बनती है।जदयू के अनुसार, फरक्का से जुड़े जल प्रबंधन और पानी के बंटवारे का असर बिहार की जल उपलब्धता पर पड़ता है। पार्टी ने किसानों, आम लोगों और उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए राज्य के हिस्से के पानी और जल संसाधनों को लेकर ठोस नीति की आवश्यकता जताई।12 जिलों में चलेगा जनसंवादजदयू ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।पार्टी नेताओं ने कहा कि अभियान का उद्देश्य फरक्का जल संधि के प्रभावों को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू करना और बिहार के जल अधिकार से जुड़े मुद्दे को व्यापक स्तर पर सामने लाना है।
राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने की कोशिशप्रेसवार्ता में जदयू नेताओं ने कहा कि ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ को लोगों का समर्थन मिल रहा है। पार्टी का कहना है कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि बिहार के किसानों, आम नागरिकों, उद्योगों और भविष्य की जल जरूरतों से जुड़ा विषय है।नेताओं ने कहा कि फरक्का जल संधि के भविष्य पर पुनर्विचार होना चाहिए और किसी भी निर्णय में बिहार की वर्तमान तथा भविष्य की जल आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जदयू ने केंद्र सरकार से बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए संधि के नवीनीकरण पर पुनर्विचार की मांग की।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
