भभुआ में सोख्ता निर्माण की जांच तेज खेतों में बने सोख्तों पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

सोख्ता निर्माण की जांच में कई सवालों ने पकड़ा जोर, ग्रामीणों ने कहा– निष्पक्ष जांच से खुलेंगे घोटाले के राज

डीसीएलआर के नेतृत्व में गठित टीम ने डिहरा व कैथी पंचायत में किया स्थलीय निरीक्षण, खेतों में बने सोख्तों और निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

भभुआ प्रखंड में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत कराए गए सोख्ता निर्माण में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद प्रशासन की जांच प्रक्रिया तेज हो गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम ने बुधवार को भभुआ डीसीएलआर श्रेया कुमारी के नेतृत्व में डिहरा एवं कैथी पंचायत के विभिन्न गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया।

जांच के दौरान ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सोख्तों के चयनित स्थान और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।दोपहर करीब तीन बजे जांच टीम सबसे पहले डिहरा पंचायत के सेमरिया गांव पहुंची, जहां वायरल वीडियो में चर्चित सोख्ता निर्माण का निरीक्षण किया गया। टीम ने चार से पांच पूर्ण निर्मित सोख्तों की जांच की। निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि तकनीकी टीम के पास माप लेने के लिए मेजरमेंट टेप तक उपलब्ध नहीं था। ऐसे में सोख्तों की गहराई पेड़ों के डंठल के सहारे अनुमान के आधार पर जांची गई, जिससे ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया की गंभीरता पर भी सवाल खड़े किए।ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश सोख्तों का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। कई स्थानों पर सोख्तों की गहराई कम मिली, जबकि ढक्कनों की मोटाई भी मानक से कम दिखाई दी।

वहीं कई निर्माण स्थलों पर ईंटों की जोड़ाई हाथ लगाने मात्र से उखड़ती नजर आई। ग्रामीणों ने सीमेंट और मसाले की गुणवत्ता पर भी गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे घटिया निर्माण का उदाहरण बताया।जांच के दौरान सबसे अधिक चर्चा सेमरिया गांव के उस सोख्ते की रही, जो खेत के बीच करीब दो फीट ऊंचे स्थान पर बनाया गया है। ग्रामीणों का कहना था कि वहां न कोई मकान है, न हैंडपंप और न ही जल निकासी की कोई व्यवस्था। केवल एक फूस का झोपड़ा होने के बावजूद सरकारी राशि खर्च कर सोख्ता बना दिया गया। ग्रामीणों ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बताया।इसके बाद जांच टीम कैथी पंचायत के रामपुर गांव पहुंची। यहां सड़क के दोनों ओर एक ही स्थान पर दो अलग-अलग सोख्तों का निर्माण पाया गया।

एक सोख्ता मकान के समीप मिट्टी से ढंका मिला, जबकि दूसरा सड़क के दूसरी ओर खेत में सड़क से करीब दो से ढाई फीट नीचे बना हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर दूसरा सोख्ता बनाया गया है, वहां न कोई आवास है और न ही जल निकासी की कोई व्यवस्था। ऐसे में वहां सोख्ता निर्माण की आवश्यकता पर लोगों ने सवाल उठाए।निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुटे रहे और उन्होंने अधिकारियों के समक्ष आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में व्यापक अनियमितता हुई है तथा सरकारी राशि की बंदरबांट की गई है। ग्रामीणों ने मांग की कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और दोषी अधिकारियों एवं संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

डीसीएलआर श्रेया कुमारी ने बताया कि विभिन्न गांवों में स्थल जांच की गई है तथा अन्य स्थानों का निरीक्षण अभी शेष है। सभी संबंधित अधिकारियों द्वारा संयुक्त जांच रिपोर्ट तैयार कर सक्षम पदाधिकारी को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।उल्लेखनीय है कि भभुआ प्रखंड के बारे गांव निवासी कमलेश कुमार ने जिलाधिकारी, डीडीसी एवं डीआरडीए निदेशक को लिखित आवेदन देकर तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यकाल में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत कराए गए सोख्ता निर्माण में व्यापक अनियमितता का आरोप लगाया था। इसी शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी ने डीसीएलआर के नेतृत्व में जांच टीम का गठन किया है। अब जिले की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट

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