
एक्सप्रेस हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध, करजी में किसानों ने लिया जमीन नहीं देने का संकल्प
चैनपुर (कैमूर)। कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम करजी में रविवार, 23 अगस्त 2026 को एक्सप्रेस हाईवे के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुई, जिसमें करजावं पंचायत सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता करजावं पंचायत के मुखिया घनश्याम पाल ने की।बैठक में किसानों ने प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कृषि भूमि उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
किसानों का कहना था कि खेती की जमीन केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा, बेटियों की शादी और परिवार के इलाज सहित रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने का मुख्य साधन है।बैठक को संबोधित करते हुए करजावं पंचायत के मुखिया घनश्याम पाल ने कहा कि वे किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और खेती-किसानी की परेशानियों एवं उसकी अहमियत को अच्छी तरह समझते हैं।
उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि किसानों के हित और उनकी जमीन से जुड़े मुद्दे पर वे उनके साथ तन, मन और धन से खड़े रहेंगे।बैठक में मौजूद किसानों ने एक स्वर में कहा कि उनकी जमीन उनके लिए मां के समान है। इसी जमीन से उन्हें अपनी आजीविका मिलती है और परिवार का पालन-पोषण होता है। किसानों ने कहा कि कृषि भूमि चले जाने के बाद उनके सामने रोजगार और परिवार के भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।किसानों ने कहा कि खेती की आमदनी से ही बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी, परिवार के सदस्यों की दवा-इलाज और अन्य जरूरी खर्च पूरे किए जाते हैं।
ऐसे में यदि उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली जाती है तो उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। किसानों ने कहा कि जमीन के बिना उनका भविष्य असुरक्षित हो जाएगा और वे अपनी पुश्तैनी आजीविका से वंचित हो जाएंगे।बैठक के दौरान किसानों ने भूमि अधिग्रहण के विरोध में नारे भी लगाए। किसानों ने सामूहिक रूप से “जमीन नहीं तो किसानी नहीं” का नारा देते हुए अपनी जमीन नहीं देने का संकल्प व्यक्त किया। किसानों ने कहा कि वे अपनी कृषि भूमि को बचाने के लिए एकजुट होकर आगे भी विरोध दर्ज कराते रहेंगे।बैठक में किसानों के बीच इस बात पर भी जोर दिया गया कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और किसानों की सहमति एवं हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की प्रक्रिया की जाए।
किसानों ने कहा कि उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों एवं सरकार तक पहुंचाया जाएगा।बैठक में आलोक कुमार उपाध्याय, जमुना जी उपाध्याय, गुरुदेव उपाध्याय, कविंद्र सिंह, अंकित उपाध्याय, दद्दन चौबे, हनुमान चौबे, कामेश्वर तिवारी, चंद्रमौली उपाध्याय, संजय कुमार गॉड, महेंद्र प्रजापति, विपिन उपाध्याय, कुंदन उपाध्याय, मनोज कुमार चौबे, रामानुज उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।किसानों ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर वे संगठित होकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे और अपनी कृषि भूमि की रक्षा के लिए आगे भी बैठक एवं आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट )
