
औद्योगिक पार्क के विरोध में किसानों की बैठक, खेत-खलिहान बचाने का लिया संकल्प
चैनपुर (कैमूर)। कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत पंचायत सिरबिट के ग्राम कुरई स्थित सामुदायिक भवन में सोमवार, 24 अगस्त 2026 को प्रस्तावित औद्योगिक पार्क के विरोध में किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य “खेत-खलिहान बचाओ अभियान” के तहत किसानों की जमीन को प्रस्तावित औद्योगिक पार्क के लिए अधिग्रहित किए जाने के विरोध में सामूहिक रूप से आवाज उठाना रहा।बैठक की अध्यक्षता श्री राम चौबे ने की। इस दौरान उप मुखिया रतन सेन चौबे समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
बैठक में किसानों ने प्रस्तावित औद्योगिक पार्क को लेकर अपनी चिंताओं और विरोध को खुलकर सामने रखा। किसानों का कहना था कि उनकी जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार है। इन जमीनों पर वर्षों से खेती कर परिवार का भरण-पोषण किया जा रहा है।बैठक के दौरान किसानों ने अपनी बहुफसली एवं सिंचित कृषि भूमि को औद्योगिक पार्क के लिए नहीं देने का सामूहिक संकल्प लिया। किसानों ने कहा कि खेती योग्य जमीन के अधिग्रहण से उनके सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
उनका कहना था कि कृषि भूमि पर निर्भर परिवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक पार्क की योजना पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।औद्योगिक पार्क के प्रस्ताव की जानकारी मिलने के बाद किसानों में नाराजगी देखने को मिली। बैठक में मौजूद किसानों ने कहा कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर देने के पक्ष में नहीं हैं। किसानों ने स्पष्ट किया कि “खेत बचेंगे तो किसान बचेंगे और किसान बचेंगे तो गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत रहेगी।” उन्होंने कहा कि वे अपने खेत-खलिहान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
किसानों ने कहा कि उनकी जमीन बहुफसली और सिंचित है, जिससे प्रत्येक वर्ष विभिन्न फसलों का उत्पादन होता है। ऐसी भूमि के औद्योगिक उपयोग में चले जाने से न केवल किसानों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। किसानों ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि किसी भी प्रकार की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित किसानों की बात सुनी जाए और उनकी सहमति एवं हितों को प्राथमिकता दी जाए।बैठक में किसानों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि प्रस्तावित औद्योगिक पार्क के खिलाफ उनका विरोध केवल व्यक्तिगत जमीन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह कृषि भूमि, किसानों की आजीविका और ग्रामीण जीवन को बचाने का अभियान है।
किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग को संबंधित अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाएंगे।बैठक में अजय चौबे, प्रदीप गोद, मृत्युंजय चौबे, श्री राम चौबे, अभिमन्यु चौबे, मुन्ना साह, संतोष सिंह, कन्हैया चौबे, रतन सिंह चौबे, ओंकारनाथ चौबे, कमल चौबे, मंटू तिवारी सहित बड़ी संख्या में अन्य किसान मौजूद रहे।बैठक के अंत में किसानों ने एक स्वर में कहा कि खेती योग्य भूमि को बचाने के लिए वे संगठित रहेंगे और प्रस्तावित औद्योगिक पार्क के लिए अपनी जमीन नहीं देने के संकल्प पर कायम रहेंगे। किसानों ने प्रशासन से मामले में संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
