
जमीन बचाने के लिए एकजुट हुए किसान, डीएम को सौंपेंगे मांगों का ज्ञापन
चैनपुर/कैमूर। कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम करजी में रविवार, 20 सितंबर 2026 को औद्योगिक गलियारा (पार्क) बनाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में किसानों की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया और अपनी उपजाऊ जमीन को औद्योगिक परियोजना के लिए दिए जाने का विरोध जताया।बैठक की अध्यक्षता वृद्ध किसान शशिकांत चौबे ने की, जबकि संचालन बनारसी उपाध्याय ने किया।
बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में रविशंकर सिंह सहित राधेश्याम पाल, मुखिया युगल किशोर उपाध्याय, रमेश सिंह, अशोक सिंह कुशवाहा, अभिमन्यु सिंह, विनोद कुमार सिन्हा, अजय कुमार चौबे, अजय कुमार, मुन्ना शाह, सुरेंद्र राम, श्रीराम चौबे समेत कई किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।बैठक के दौरान किसानों ने औद्योगिक गलियारे के लिए कृषि भूमि लिए जाने के प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। किसानों का कहना था कि उनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है और कृषि भूमि उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा का प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि उपजाऊ जमीन चले जाने से किसानों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट उत्पन्न हो सकता है।
बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि 22 सितंबर 2026 को किसान सामूहिक रूप से जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे। किसानों ने जिला प्रशासन से औद्योगिक गलियारे के लिए उनकी कृषि भूमि लिए जाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने का अनुरोध करने का निर्णय लिया।किसानों ने कहा कि जमीन उनके लिए केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और भविष्य का आधार है। बैठक में मौजूद किसानों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी उपजाऊ जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं और प्रशासन के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ेंगे।बैठक के दौरान कुछ किसानों ने अपनी मांग पर जोर देते हुए यह भी कहा कि यदि उनकी इच्छा के विरुद्ध जमीन लेने के लिए जबरदस्ती की गई तो वे अत्यंत कठोर कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं।
बैठक में आत्मदाह जैसे कदम की चेतावनी भी व्यक्त की गई। हालांकि, ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए किसानों और प्रशासन के बीच संवाद एवं समाधान का रास्ता निकालने पर जोर दिया गया।किसानों ने कहा कि 22 सितंबर को जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वे अपनी आपत्तियों, जमीन से जुड़ी चिंताओं और मांगों को विस्तार से रखेंगे। अब किसानों की नजर जिला प्रशासन की ओर है कि उनकी मांगों पर क्या पहल की जाती है।बैठक में उपस्थित किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया कि किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित किसानों से बातचीत की जाए और उनकी सहमति, आजीविका तथा कृषि भूमि से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाए।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
