
हथकरघा के हुनर से आत्मनिर्भर बना बेगम अफरोज का परिवार, सालाना 8 से 10 लाख रुपये का कारोबार
चैनपुर (कैमूर)। ग्रामीण आजीविका एवं महिला सशक्तीकरण की दिशा में चैनपुर प्रखंड के गंगापुर गांव की बेगम अफरोज ने प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। पारंपरिक हथकरघा उद्योग को आजीविका का माध्यम बनाकर उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके परिवार द्वारा दरी एवं कालीन निर्माण के व्यवसाय से प्रतिवर्ष करीब 8 से 10 लाख रुपये का कारोबार किया जा रहा है।
बेगम अफरोज (पति मुस्लिम मिर्जा) ग्राम संगठन गंगापुर की सदस्य हैं। उनके परिवार के सभी सदस्य मिलकर दरी एवं कालीन बनाने के काम में जुटे रहते हैं। हथकरघा पर पूरे वर्ष मेहनत और लगन से विभिन्न प्रकार की दरी एवं कालीन तैयार की जाती हैं। इसके बाद तैयार उत्पादों को खुदरा सहित विभिन्न बाजारों में बिक्री के लिए भेजा जाता है।पारिवारिक सहयोग और पारंपरिक हुनर के बल पर खड़ा किया गया यह व्यवसाय न केवल परिवार की आमदनी का मजबूत जरिया बना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाओं को भी दर्शाता है।

आधुनिक मशीनीकरण के दौर में परिवार की यह पहल पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प कला के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।जिलाधिकारी कैमूर ने बेगम अफरोज एवं उनके परिवार के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे जिले की अन्य ग्रामीण महिलाओं और परिवारों के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय हुनर एवं पारंपरिक कौशल को आजीविका से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उनके कौशल के अनुरूप बेहतर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।बेगम अफरोज की सफलता यह साबित करती है कि पारिवारिक सहयोग, मेहनत और पारंपरिक हुनर के सहारे ग्रामीण परिवेश में भी सफल उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की एक मिसाल बन रही है।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
