हिंदी हमारी सभ्यता-संस्कृति की पहचान, नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ना जरूरी

हिंदी हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान, नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ना जरूरीचांद प्रखंड में हिंदी दिवस पर विशेष बैठक आयोजित, अधिकारियों व कर्मियों ने हिंदी के संरक्षण का लिया संकल्प

चांद/कैमूर। हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार, 14 सितंबर 2026 को चांद प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित सभा कक्ष में हिंदी भाषा के महत्व एवं उसके संरक्षण को लेकर एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद हदीद खान ने की। इस दौरान प्रखंड के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।बैठक में पंचायती राज विभाग से अंकित कुमार, छने लाल एवं मोहम्मद शहनाज, स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी बबलू सिंह सहित प्रखंड के समाचार कर्मियों एवं अन्य कर्मियों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने हिंदी दिवस के महत्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए हिंदी भाषा को भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान बताया।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से जुड़ी हुई भाषा है। हिंदी को हमारी पूर्वजों से विरासत के रूप में प्राप्त हुई है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की भी है। वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय के साथ अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन इसके साथ अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति सम्मान और उसके प्रयोग को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।इस दौरान नई पीढ़ी को हिंदी भाषा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और आधुनिक शिक्षा के उद्देश्य से उन्हें कॉन्वेंट एवं अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं।

अंग्रेजी का ज्ञान निश्चित रूप से बच्चों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास में सहायक है, लेकिन इसके साथ हिंदी भाषा के ज्ञान और संस्कार से बच्चों को वंचित नहीं होना चाहिए।वक्ताओं ने कहा कि कई बच्चे अंग्रेजी में अच्छी पकड़ बना लेते हैं, लेकिन हिंदी पढ़ने, लिखने और सही तरीके से बोलने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भाषा के प्रति भी रुचि पैदा करें। घर में हिंदी का नियमित प्रयोग, हिंदी की पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करना तथा हिंदी साहित्य एवं संस्कृति से बच्चों को परिचित कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।बैठक में हिंदी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।

सरकारी कार्यालयों में हिंदी के सरल एवं सहज प्रयोग तथा आम लोगों तक सरकारी योजनाओं और सूचनाओं को हिंदी के माध्यम से प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दिया गया।अधिकारियों एवं कर्मियों ने कहा कि भाषा का संरक्षण केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन और कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना आवश्यक है। हिंदी दिवस हमें अपनी भाषा के प्रति सम्मान, जिम्मेदारी और गौरव का भाव रखने का संदेश देता है।बैठक के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने हिंदी भाषा के सम्मान एवं संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना रहा।

( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)

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