
बिहार की शैक्षणिक विरासत में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। कैमूर जिले के सुयोग्य एवं कर्मठ शिक्षक श्री विपिन बिहारी उपाध्याय को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अखिल भारतीय सारस्वत परिषद, वाराणसी द्वारा “सारस्वत सम्मान शिक्षा” से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह खबर न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे कैमूर जिले और शिक्षा जगत के लिए गौरव का विषय है। *शिक्षा और संस्कारों का संगम*बता दें कि विपिन बिहारी उपाध्याय वर्तमान में उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कुडा़सन में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके पास वर्षों का समृद्ध अनुभव है। वे न केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देते हैं, बल्कि उनके चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों के संवर्धन पर भी विशेष जोर देते हैं। उनकी अनुशासनप्रियता और शिक्षण के प्रति समर्पण ही है कि आज उनके मार्गदर्शन में पढ़े अनेक छात्र विभिन्न क्षेत्रों में सफलता का परचम लहरा रहे हैं।*काशी की पावन धरती पर होगा सम्मान समारोह*वही इस विशेष उपलब्धि के लिए सम्मान समारोह का आयोजन आगामी 23 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में किया जाएगा। कार्यक्रम काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित वैदिक विज्ञान केंद्र के व्याख्यान कक्ष में संपन्न होगा। आपको बताते हुए चलें कि अखिल भारतीय सारस्वत परिषद द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने वाले प्रबुद्ध व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है।*युवाओं और शिक्षकों के लिए प्रेरणा* वही विपिन बिहारी उपाध्याय की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि शिक्षक अपने कार्य को निष्ठा और ईमानदारी से करे, तो उसे न केवल विद्यार्थियों का स्नेह मिलता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलती है। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए परिश्रम और शिक्षकों के लिए सेवा भाव का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है।वही विपिन बिहारी उपाध्याय ने आगे कहा कि “शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि एक बेहतर मनुष्य बनाने की प्रक्रिया है। आपको आगे बताते हुए चलें कि विपिन बिहारी उपाध्याय ने अपने जीवन के कई वर्ष इसी ध्येय को समर्पित किए हैं।”
। ( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)
