
उस्मान शाह रहमतुल्लाह अलैह का उर्स बड़े अकीदत-ओ-एहतराम के साथ मनाया गया उस्मान कुटी में उमड़ा ज़ायरीन का सैलाब, हिंदू–मुस्लिम एकता की मिसाल पेशकैमूर (चैनपुर): चैनपुर प्रखंड अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध दरगाह उस्मान कुटी में मंगलवार 17 फरवरी को हज़रत उस्मान शाह रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स बड़े अकीदत-ओ-एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स के मौके पर सुबह से ही दरगाह परिसर में ज़ायरीन की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज़ गांवों और पड़ोसी जिलों से आए श्रद्धालुओं ने दरगाह पर चादरपोशी कर जियारत की और अमन-चैन व खुशहाली की दुआएं मांगीं।दरगाह, जिसे स्थानीय लोग “उस्मान कुटी” के नाम से जानते हैं, क्षेत्र में आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की प्रतीक मानी जाती है। यहां हर वर्ष उर्स के अवसर पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में एकत्र होकर साझा संस्कृति की अनूठी मिसाल पेश करते हैं।उर्स के दौरान दरगाह परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। धार्मिक कार्यक्रमों के तहत कुरआनखानी, फातेहा और दुआ का आयोजन हुआ। शाम होते-होते माहौल पूरी तरह रूहानी हो गया। ज़ायरीन ने अपनी-अपनी मन्नतें मांगीं और दरगाह पर चादर चढ़ाकर अकीदत का इज़हार किया।प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। उर्स से एक दिन पहले से ही ज़ायरीन का आना-जाना शुरू हो गया था। आयोजकों की ओर से लंगर का विशेष इंतज़ाम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।स्थानीय लोगों के अनुसार, उस्मान शाह रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन उर्स के अवसर पर यहां का नज़ारा विशेष रूप से भव्य और आध्यात्मिक हो जाता है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का भी प्रतीक बन चुका है।
( कैमुर से अफसार आलम)
