रैयत टेंडर और राजस्व वसूली को लेकर पार्षदों में आक्रोश

सैरात टेंडर और राजस्व वसूली को लेकर वार्ड पार्षदों में आक्रोश कार्यपालक पदाधिकारी पर सुझावों की अनदेखी का आरोप

कुदरा नगर पंचायत कार्यालय में सोमवार को कार्यपालक पदाधिकारी उजाली राज के नेतृत्व में वार्ड पार्षदों के साथ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई बैठक का उद्देश्य नगर पंचायत के विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करना था, लेकिन बैठक के दौरान ही पार्षदों में असंतोष और नाराजगी खुलकर सामने आ गई।बैठक में उपस्थित वार्ड पार्षदों ने आरोप लगाया कि कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा केवल औपचारिकता निभाने के लिए बैठक बुलाई जाती है। पार्षद नियमित रूप से बैठकों में भाग लेते हैं और विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव भी रखते हैं, लेकिन उनके सुझावों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

उनका कहना है कि बैठक में जिन बिंदुओं पर सहमति बनती है, उसके विपरीत बाद में कार्यपालक पदाधिकारी अपने स्तर से मनमाने ढंग से निर्णय लेकर कार्य करवाते हैं।बैठक का एक प्रमुख मुद्दा सैरात टेंडर प्रक्रिया को लेकर रहा। पार्षदों ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल संभावित संवेदकों ने सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

इससे नगर पंचायत की आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई।इसके अतिरिक्त सैरात वसूली की अंतिम तिथि, निर्धारित समय सीमा के बाद वसूली की जिम्मेदारी, तथा संभावित राजस्व क्षति की भरपाई किसके द्वारा की जाएगी—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने से पार्षदों में आक्रोश व्याप्त है।बैठक के दौरान इन मुद्दों को लेकर पार्षदों और कार्यपालक पदाधिकारी के बीच तीखी बहस भी हुई। पार्षदों ने मांग की कि उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाए, निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए तथा नगर पंचायत के कार्यों में सामूहिक सहमति को प्राथमिकता दी जाए।अंत में पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो वे आगे की रणनीति बनाने के लिए बाध्य होंगे।

( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)

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