
पत्रकार को सच दिखाने की कीमत? खड़ी बाइक पर हेलमेट का चालान,
1000 रुपये जुर्मानाकुदरा में विवाद: वाहन मालिक ने कार्रवाई को बताया ‘टारगेटेड’, निष्पक्ष जांच की मांग
कुदरा (कैमूर), 28 अप्रैल 2026:कैमूर जिले के कुदरा थाना क्षेत्र में एक पत्रकार की खड़ी बाइक का हेलमेट नहीं पहनने के आरोप में चालान काटे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना कुदरा के स्मार्ट प्वाइंट के सामने की बताई जा रही है, जहां खड़ी बाइक पर ₹3000 का चालान काटे जाने के बाद वाहन मालिक ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुबौली गांव (थाना करमचट) निवासी रूपेश दुबे, जो पेशे से पत्रकार हैं, अपनी बाइक स्मार्ट प्वाइंट के समीप खड़ी कर किसी कार्य से गए हुए थे। इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में ही ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के नाम पर हेलमेट नहीं पहनने का चालान काट दिया गया और ₹3000 की रसीद थमा दी गई।
रूपेश दुबे का आरोप है कि जिस स्थान पर उनकी बाइक खड़ी थी, वहां कई अन्य वाहन भी मौजूद थे, लेकिन केवल उनकी ही बाइक को निशाना बनाते हुए चालान काटा गया। उन्होंने इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए कहा कि वे लगातार कुदरा क्षेत्र की समस्याओं और घटनाओं को लेकर समाचार प्रकाशित करते रहे हैं, जिसके कारण उन्हें टारगेट किया जा रहा है।उन्होंने कहा, “मैं अपना काम कर रहा था और गाड़ी खड़ी थी। ऐसे में हेलमेट न पहनने का चालान काटना समझ से परे है।
अगर नियमों का पालन कराना है तो सभी पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।”इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा का माहौल है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि वाहन खड़ा था तो हेलमेट न पहनने का चालान कैसे किया गया। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ट्रैफिक नियमों के पालन में पारदर्शिता और समानता बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।हालांकि, इस मामले में अब तक पुलिस या ट्रैफिक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मामले की सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांगघटना के बाद रूपेश दुबे ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चालान नियमों के तहत किया गया या किसी विशेष उद्देश्य से।निष्कर्ष:यह मामला जहां एक ओर ट्रैफिक नियमों के पालन और उसकी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है, वहीं दूसरी ओर निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या जांच के बाद सच्चाई सामने आ पाती है।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
