
हज़रत सुफी संत बाबा गुलाम साबिर शाह रहमतुल्लाह अलैह का 60 वां सालाना उर्स -ए पाक अकीदतो एहतराम के साथ मनाया गया
चैनपुर (कैमूर)। चैनपुर प्रखंड के ऐतिहासिक और रूहानी मरकज़ बिउर शरीफ़ में हज़रत सूफ़ी संत बाबा गुलाम साबिर शाह रहमतुल्लाह अलैह का 60वाँ सालाना उर्स-ए-पाक शनिवार को पूरे अदब, अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स के मौके पर बिहार समेत विभिन्न इलाक़ों से बड़ी तादाद में मुरीदीन, अकीदतमंदों और ज़ायरीन ने शरीक होकर बुज़ुर्ग-ए-दीन की बारगाह में हाज़िरी दी और ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया।उर्स-ए-पाक की तमाम रस्में और अरकान रूदौली शरीफ़ के गद्दीनशीन हज़रत शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ़ नैय्यर मियाँ साहब की ज़ेरे-सरपरस्ती अंजाम दिए गए। इस रूहानी इज्तिमा में ख़ानकाह साबरी आमजदिया, सिवान के सज्जादानशीन डॉ. शाह इतफात साबरी अमजदी की ख़ास मौजूदगी रही।
इसके अलावा सिलसिला-ए-साबरिया से ताल्लुक़ रखने वाले मशाइख़, उलमा-ए-किराम, फुक़रा और मुरीदीन भी बड़ी तादाद में मौजूद रहे।उर्स के दौरान कुरआनख़्वानी, फ़ातेहाख़्वानी, ज़िक्र-ओ-अज़कार, महफ़िल-ए-नात, चादरपोशी और ख़ुसूसी दुआ का एहतिमाम किया गया। उलमा-ए-किराम और मशाइख़-ए-इज़ाम ने अपने बयानात में औलिया-ए-किराम की तालीमात पर रोशनी डालते हुए कहा कि सूफ़िया-ए-किराम ने हमेशा मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे, अमन और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का पैग़ाम दिया है, जिसे आम करने की आज सख़्त ज़रूरत है।महफ़िल के दौरान मुल्क की सलामती, कौमी यकजहती, अमन-ओ-अमान, तरक़्क़ी, खुशहाली और इंसानियत की भलाई के लिए ख़ुसूसी दुआएँ की गईं।
अकीदतमंदों ने बाबा गुलाम साबिर शाह रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर चादर और फूल पेश कर अपनी मुरादों की कबूलियत तथा रूहानी फ़ैज़-ओ-बरकत की दुआ मांगी।पूरे आयोजन के दौरान रूहानियत और अकीदत का समां बंधा रहा। ज़ायरीन की सहूलियत, ठहरने, खाने-पीने और सुरक्षा के लिए उर्स इंतज़ामिया कमेटी की ओर से मुकम्मल इंतज़ाम किए गए थे। उर्स के सफल आयोजन पर अकीदतमंदों ने इंतज़ामिया कमेटी और ख़ादिमीन को मुबारकबाद पेश की।
। ( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
