बाल श्रम के खिलाफ कैमूर में जागरूकता अभियान तेज, अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर दिलाई गई शपथ
संयुक्त श्रम भवन से जागरूकता रथ रवाना, महिला आईटीआई में हुई चित्रकारी प्रतियोगिताबाल श्रम कराने पर 2 वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान :
भभुआ (कैमूर)। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, कैमूर द्वारा जिले में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बाल श्रम उन्मूलन एवं बच्चों के अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से इटाढ़ी स्थित संयुक्त श्रम भवन में बाल श्रम के विरुद्ध शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में श्रम अधीक्षक चंदन कुमार, सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, विभागीय कर्मियों तथा अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।
इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने बाल श्रम के खिलाफ संघर्ष करने तथा बच्चों को शिक्षा एवं सुरक्षित बचपन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया।शपथ ग्रहण कार्यक्रम के उपरांत श्रम अधीक्षक द्वारा एक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर बाल श्रम निषेध संबंधी संदेशों का प्रचार-प्रसार करेगा तथा आम लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी देगा।इसी क्रम में भेकास स्थित महिला आईटीआई में चित्रकारी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता की मुख्य थीम “बाल श्रम को लाल कार्ड” रही, जो इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की वैश्विक थीम भी है। प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपने चित्रों के माध्यम से बाल श्रम के खिलाफ सशक्त संदेश दिया और बच्चों को शिक्षा तथा बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।विभाग द्वारा जिले के विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं कारखानों में भी जागरूकता अभियान चलाया गया।
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने नवरंगराय एग्रो, यश लक्ष्मी इकोपैक, पतंजलि बिस्किट फैक्ट्री समेत कई संस्थानों का भ्रमण कर श्रमिकों एवं प्रबंधन को बाल श्रम निषेध कानून की जानकारी दी तथा इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।इसके अलावा लिच्छवी भवन में भी एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां श्रम अधीक्षक श्री चंदन कुमार ने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों को बाल श्रम उन्मूलन के लिए सामूहिक शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि बाल श्रम समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है और इसे समाप्त करने के लिए प्रशासन, उद्योग जगत तथा आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा।श्रम विभाग ने लोगों को जानकारी देते हुए बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना तथा 14 से 18 वर्ष के किशोरों से जोखिमपूर्ण कार्य कराना संज्ञेय अपराध है।
कानून के तहत दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक का कारावास अथवा 50 हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।अधिकारियों ने आम जनता से अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम की सूचना मिले तो इसकी जानकारी तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि बच्चों को शोषण से मुक्त कर उन्हें शिक्षा और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराया जा सके।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
