
सात निश्चय योजना की नल-जल व्यवस्था पर सवाल, वर्षों से मानदेय नहीं मिलने पर पंप ऑपरेटरों में आक्रोशकैमूर जिले के कई पंचायतों में हालात गंभीर, विभाग और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोपभभुआ (कैमूर): सात निश्चय योजना के तहत संचालित मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना, जिसे आम बोलचाल में नल-जल योजना के नाम से जाना जाता है, कभी बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और बहुचर्चित योजनाओं में शामिल रही।
इस योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। प्रारंभ में इसका संचालन पंचायती राज विभाग के माध्यम से किया गया, लेकिन बाद में इसे लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को सौंप दिया गया।विभागीय हस्तांतरण के बाद नल-जल योजना के रख-रखाव एवं संचालन का जिम्मा ठेकेदारों को दिया गया। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कैमूर जिले के कई पंचायतों में नल-जल योजना या तो पूरी तरह ठप पड़ी है या फिर अनियमित रूप से संचालित हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है, मोटर खराब हैं और मरम्मत कार्य समय पर नहीं हो रहा।सबसे गंभीर स्थिति पंप ऑपरेटरों की बताई जा रही है। पीएचईडी के अधीन कार्यरत पंप ऑपरेटरों को पिछले कई वर्षों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। आरोप है कि न तो संबंधित ठेकेदार इस दिशा में कोई पहल कर रहे हैं और न ही विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हो रही है। कई पंप ऑपरेटरों का कहना है कि वे स्थायी अथवा अस्थायी रूप से वर्षों से जुड़े हुए हैं, लेकिन अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कुछ ने बताया कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है और भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर राज्य सरकार नई-नई बहालियों और योजनाओं की घोषणा कर रही है, वहीं पहले से कार्यरत कर्मियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। उनका आरोप है कि बड़े-बड़े दावे और जमीनी हकीकत में भारी अंतर नजर आ रहा है।कैमूर जिले के कई पंचायतों में पंप ऑपरेटरों को वर्षों से भुगतान नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। ऑपरेटरों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल पाया है।
पंप ऑपरेटरों का कहना है कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।अब देखना यह होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और नल-जल योजना को पटरी पर लाने के साथ-साथ पंप ऑपरेटरों के बकाया मानदेय का भुगतान कब तक सुनिश्चित करते हैं।
( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)
