शिक्षाविदों और कुलपतियों नें विपिन बिहारी उपाध्याय के कार्यों का किया सराहना

कैमूर के शिक्षक बिपिन बिहारी उपाध्याय का राष्ट्रीय स्तर पर मिला सारस्वत सम्मान,शिक्षाविदों और कुलपतियों ने बिपिन बिहारी उपाध्याय के कार्यों का किया सराहनाकैमूर। शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों की गूँज जब राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई देती है, तो पूरे क्षेत्र का मस्तक गर्व से ऊँचा हो जाता है। कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड अंतर्गत कोहारी गांव के निवासी और मध्य विद्यालय, कुड़ासन के शिक्षक बिपिन बिहारी उपाध्याय ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उन्हें हाल ही में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैदिक विज्ञान केंद्र के व्याख्यान कक्ष में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रतिष्ठित ‘सारस्वत सम्मान’ से नवाजा गया।

दिग्गज कुलपतियों ने थपथपाई पीठ

शिक्षक बिपिन बिहारी को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए दिया गया। कार्यक्रम के दौरान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (छत्तीसगढ़) के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल और महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर (राजस्थान) के कुलपति प्रो. आचार्य मनोज दीक्षित जैसे दिग्गज शिक्षाविदों ने उन्हें सम्मानित किया। इन प्रबुद्ध जनों ने बिपिन बिहारी के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बताया।

संघर्ष और सादगी की जीत

सम्मान पाकर भावुक हुए बिपिन बिहारी उपाध्याय ने अपनी सफलता का श्रेय अपने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को दिया। उन्होंने कहा कि “एक साधारण और छोटे परिवार से आने के बावजूद मेरा एकमात्र लक्ष्य बच्चों के भविष्य को संवारना रहा है। यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि उन बच्चों के विश्वास और अभिभावकों के आशीर्वाद का परिणाम है।”

गांव से लेकर जिले तक जश्न का माहौल

कोहारी जैसे छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले बिपिन बिहारी की इस उपलब्धि पर पूरे भभुआ प्रखंड में खुशी की लहर है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत से कैमूर की मिट्टी का मान पूरे देश में बढ़ाया है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

बिपिन बिहारी की यह सफलता आज केयुवाओं और शिक्षकों के लिए एक जीवंत उदाहरण हैकि यदि नीयत साफ हो और परिश्रम निरंतर किया जाए, तो सफलता की राह में कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। उनके पैतृक गांव और कार्यस्थल पर लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं।

। ( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)

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