भभुआ में महिला दरोगा पर मारपीट का आरोप सफाई कर्मियों का थाने पर जोरदार प्रदर्शन

भभुआ में महिला दरोगा पर मारपीट का आरोप, सफाईकर्मियों का थाने पर हंगामानिलंबन और निष्पक्ष जांच की मांग, प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासनभभुआ (कैमूर): नगर परिषद भभुआ के एक सफाईकर्मी के साथ कथित मारपीट और झूठा केस दर्ज कराने की धमकी देने के आरोप में नवपदस्थापित महिला दरोगा चंद्र प्रभा विवादों में घिर गई हैं।

गुरुवार दोपहर मामला उस समय तूल पकड़ गया जब नगर परिषद भभुआ के सैकड़ों सफाईकर्मी थाने पहुंच गए और आरोपी दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया।क्या है पूरा मामला?पीड़ित संतोष कुमार रावत, जो नगर परिषद भभुआ में सफाईकर्मी के पद पर कार्यरत हैं तथा निजी तौर पर बिजली मरम्मत का काम भी करते हैं, ने आरोप लगाया कि उन्हें महिला दरोगा चंद्र प्रभा के आवास पर बिजली और इन्वर्टर में आई खराबी को ठीक करने के लिए बुलाया गया था।

संतोष कुमार के अनुसार उन्होंने लगभग पांच घंटे तक वायरिंग और इन्वर्टर की जांच की। जांच में इन्वर्टर का इनपुट खराब पाया गया, जिसके कारण बिजली की आपूर्ति बाधित थी। उनका आरोप है कि काम पूरा करने के बाद जब उन्होंने मेहनताना मांगा, तो उन पर पैसे मांगने और चोरी करने का आरोप लगा दिया गया।पीड़ित का दावा है कि उन्हें एक कमरे में बंद कर मारपीट की गई और थाने में झूठा केस दर्ज कराने की धमकी दी गई।थाने पहुंचा सफाईकर्मियों का हुजूमघटना की जानकारी मिलते ही नगर परिषद भभुआ के सभापति के नेतृत्व में सैकड़ों सफाईकर्मी महिला थाना पहुंच गए।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यदि थाने के भीतर ही कर्मचारियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार होगा तो आम नागरिक की सुरक्षा की क्या गारंटी रह जाएगी।कर्मचारियों ने महिला दरोगा को तत्काल निलंबित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो नगर परिषद कर्मी प्रशासनिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे।प्रशासन का पक्षप्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार घटना के समय महिला थाना प्रभारी पूजा कुमारी सरकारी कार्य से थाने से बाहर थीं।उठ रहे अहम सवालइस घटना के बाद कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं—क्या मेहनताना मांगना अपराध है?यदि आरोप झूठे साबित होते हैं तो क्या संबंधित पुलिसकर्मी पर कठोर कार्रवाई होगी?थाने के भीतर आम नागरिक की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित करेगा?राज्य स्तर पर “फ्रेंडली पुलिसिंग” के दावों के बीच यह प्रकरण पुलिस-जन संवाद और कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि आखिर सच्चाई क्या है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)

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