कैमुर में दो सगे भाइयों की अनोखी मिसाल मां मुंडेश्वरी धाम को करोड़ों की लागत से सजाया

कैमूर, दिनांक:कैमूर जिले में आस्था और समर्पण की एक अनोखी मिसाल सामने आई है, जहां दो भाइयों की जोड़ी—नागेश्वर दुबे एवं सोनू दुबे—मां मुंडेश्वरी मंदिर के भव्य श्रृंगार को लेकर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। ये दोनों भाई न केवल लाखों बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से हर वर्ष नवरात्रि की अष्टमी तिथि को निशा पूजा के अवसर पर मां मुंडेश्वरी मंदिर सहित पूरे धाम परिसर को भव्य रूप से सजाते हैं।

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी (निशा पूजा) एवं कुंवार माह के शारदीय नवरात्र अष्टमी के अवसर पर पिछले लगभग 6 वर्षों से दोनों भाई अपने निजी संसाधनों से मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजवा रहे हैं। इस दौरान देश-विदेश, विशेषकर थाईलैंड सहित विभिन्न स्थानों से महंगे फूल, मालाएं एवं कलाकारों को बुलाकर अद्भुत सजावट कराई जाती है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनती है।

बताया जाता है कि भगवानपुर प्रखंड के उमापुर निवासी इन दोनों भाइयों ने मंदिर की पूर्व व्यवस्था को देखकर प्रेरित होकर यह संकल्प लिया था। लगभग 7 वर्ष पूर्व अष्टमी के दिन निशा पूजा के दौरान मंदिर में अपर्याप्त रोशनी और अव्यवस्था को देख उनका मन विचलित हुआ, जिसके बाद उन्होंने मां की सेवा में खुद को समर्पित करने का निर्णय लिया। तभी से वे हर वर्ष भव्य सजावट का कार्य करते आ रहे हैं।

नवरात्रि के दौरान पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी धाम को नीचे से ऊपर तक रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है, जिससे पूरा परिसर अलौकिक एवं मनमोहक प्रतीत होता है। इस कार्य में प्रशासन या किसी संस्था की सहायता के बिना दोनों भाई स्वयं ही संपूर्ण व्यवस्था का संचालन करते हैं।नागेश्वर दुबे के अनुसार, यह कार्य उनके छोटे भाई की गहरी आस्था और भक्ति का परिणाम है, जबकि सोनू दुबे का कहना है कि यह सेवा उनके लिए मां के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष मां का श्रृंगार एक अलग और दिव्य रूप में किया जाता है, मानो मां स्वयं अपने श्रृंगार का चयन करती हों।मंदिर की एक विशेषता यहां की प्राचीन ‘रक्तहीन बलि’ परंपरा भी है, जिसके तहत बकरे की बलि दी जाती है, किंतु वह पुनः जीवित बाहर आ जाता है। स्थानीय लोग इसे मां का चमत्कार मानते हैं।

इस वर्ष की सजावट को देखकर श्रद्धालु अभिभूत हैं। कई दर्शनार्थियों ने इसे अब तक की सबसे भव्य और मनमोहक सजावट बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो मां स्वयं भक्तों से संवाद कर रही हों।दोनों भाइयों का यह प्रयास न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज के युवाओं को सनातन धर्म के प्रति जागरूक करने और उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी दे रहा है।

( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)

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