
भभुआ में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, दो बाल श्रमिक विमुक्त दोषी नियोजक पर प्राथमिकी, ₹20,000 प्रति बालक वसूली होगी। श्रम संसाधन विभाग, कैमूर के अंतर्गत श्रम अधीक्षक के निर्देशन में बाल श्रम उन्मूलन हेतु गठित विशेष धावा दल द्वारा भभुआ सदर प्रखंड क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान अखलासपुर बस स्टैंड स्थित एक मिष्ठान भंडार के गोदाम से दो बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया।
विमुक्त बाल श्रमिक उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के निवासी पाए गए। दोनों को तत्काल संरक्षण हेतु जिला बाल कल्याण समिति, कैमूर को सुपुर्द कर दिया गया है। दोषी नियोजक के विरुद्ध बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। साथ ही प्रत्येक विमुक्त बाल श्रमिक पर ₹20,000 की वसूली की कार्रवाई (माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य के निर्देशानुसार) की जा रही है।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के प्रावधान के अन्तर्गतदोषी पाए जाने पर ₹20,000 से ₹50,000 तक जुर्माना एवं 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास का प्रावधान है। विमुक्त प्रत्येक बाल श्रमिक को ₹3,000 की तत्काल सहायता राशि प्रदान की जाती है, जिससे उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा सके।श्रम अधीक्षक ने बताया कि जिले में बाल श्रम के विरुद्ध यह अभियान नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है और आगे भी निरंतर जारी रहेगा।धावा दल का नेतृत्व श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, भभुआ सदर द्वारा किया गया। अभियान में विभिन्न प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बाल संरक्षण इकाई के सदस्य एवं पुलिस बल सक्रिय रूप से शामिल रहे।बाल श्रम एक दंडनीय अपराध है। आमजन से अपील है कि ऐसे किसी भी मामले की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सहयोग करें।
( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)
