
कैमूर में इमारत-ए-शरिया का बड़ा इजलास, शिक्षा, एकता और सामाजिक सुधार पर दिया गया जोर
दहेज प्रथा, फिरकापरस्ती और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ उठी आवाज, हजारों लोगों ने की शिरकतकैमूर जिले में इमारत-ए-शरिया के बैनर तले शनिवार की देर शाम एक भव्य सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व चीफ मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने किया।
देर रात तक चले इस इजलास में जिले के विभिन्न गांवों और प्रखंडों से हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला इंतजामिया कमेटी की अहम भूमिका रही।कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना अब्दुल मजीद रहमानी द्वारा कुरान शरीफ की तिलावत से हुई।इसके
बाद मुख्य वक्ता मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने शिक्षा और आर्थिक जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी समाज और मुल्क की तरक्की तालीम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलकर एकजुट होकर समाज को मजबूत बनाना चाहिए।सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पड़ोसी के हक अदा करने, समाज में भाईचारा बढ़ाने और इंसानियत की राह पर चलने की अपील की। उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान वही है जो अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखे और समाज में अमन-चैन कायम करे।कार्यक्रम में दहेज प्रथा के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया गया।वक्ताओंने
निकाह को आसान बनाने, बारात में फिजूलखर्ची रोकने और दहेज मुक्त समाज बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा के कारण बेटियों को बोझ समझा जाने लगा है, जिसे खत्म करना समाज की जिम्मेदारी है।सभा में बिहार में लागू शराबबंदी का समर्थन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शराब समाज में बुराइयों और पारिवारिक विवादों को बढ़ावा देती है। लोगों से शराबबंदी के समर्थन में आगे आने की अपील की गईमुस्लिम
समाज में बढ़ती फिरकापरस्ती पर चिंता जताते हुए वक्ताओं ने कहा कि जब अल्लाह, कुरान और रसूल एक हैं तो मुसलमानों को आपसी मतभेद भुलाकर एकता और भाईचारे को मजबूत करना चाहिएइजलास में वक्फ बोर्ड और यूजीसी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।वक्ताओं ने कहा कि इमारत-ए-शरिया समय-समय पर समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने का काम करती रही है।कार्यक्रम के दौरान लोगों को नेक रास्ते पर चलने, झूठ और गलत कामों से बचने तथा हलाल-हराम की पहचान करने की नसीहत दी गई। अंत में ब्लॉक स्तर से जिला स्तर तक कमेटियों के गठन की घोषणा की गई, जिसमें समाजसेवी, बुद्धिजीवी, अधिवक्ता और विभिन्न वर्गों के लोगों को शामिल करने की बात कही गई।मुख्य वक्ताओं में मौलाना कमर अनीश कासमी, मौलाना अहमद हुसैन कासमी मदनी, मुफ्ती सोहराब नदवी और काजी अंसार आलम कासमी शामिल रहे। वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में असलम खान, आरिफ अंसारी, नौशाद गद्दी, कारी अली हसन, समीम अहमद, इमामुद्दीन, एजाज, जुलकर नैन खान, मासूक खान और नौशेर अंसारी समेत कई समाजसेवियों और युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
