संभावित बढ़ ,सुखाड़ ,और लू से निपटने की तैयारियों की मंत्री ने की समीक्षा

कैमुर में बाढ़, सुखाड़, और लु से निपटने की तैयारियों की प्रभारी मंत्री ने किया समीक्षा

माननीय प्रभारी मंत्री कैमूर की अध्यक्षता में संभावित बाढ़, सुखाड़ एवं भीषण गर्मी (लू) से निपटने हेतु कैमूर जिला प्रशासन की तैयारी की हुई समीक्षा बैठक

समाहरणालय स्थित मां मुंडेश्वरी सभागार में माननीय प्रभारी मंत्री श्री संजय सिंह “टाइगर” महोदय की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला प्रशासन द्वारा आगामी मानसून के दौरान संभावित बाढ़, सुखाड़, भीषण गर्मी और लू (Heat wave) से निपटने के लिए विभागवार की गई तैयारियों और कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ मुस्तैदी से कार्य करने और आम जनमानस को हर संभव राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।संभावित बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की तैयारियां:विगत 5 वर्षों (2021-2025) के आंकड़ों के अनुसार कैमूर जिला बाढ़ प्रवण (Flood-prone) जिलों के अंतर्गत नहीं आता है।

हालांकि, बरसात के दिनों में बरसाती नदियों के जलस्तर में वृद्धि तथा मुसाखाड़ एवं करमचट डैम से पानी छोड़े जाने के कारण दुर्गावती, रामगढ़ एवं नुऑव प्रखंडों के कुछ इलाकों में आंशिक जल-जमाव की स्थिति बन जाती है।आंशिक प्रभावित होने वाले अंचलों में सुरक्षा के मद्देनजर कुल 12 निजी नाव मालिकों के साथ एकरारनामा (Agreement) कर लिया गया है, जिसमें दुर्गावती में 02, रामगढ़ में 09 और नुऑव में 01 नाव शामिल हैं।बाढ़ राहत सामग्रियों (जैसे- चावल, दाल, चूड़ा, गुड़, नमक, माचिस आदि) के लिए दर का निर्धारण 19 मई 2026 को ही कर लिया गया है। जिला में वर्तमान में 325 पॉलीथीन शीट्स उपलब्ध हैं और आपदा पीड़ितों के लिए अतिरिक्त 500 पॉलीथीन शीट्स की मांग पटना से की गई है।आपातकालीन स्थिति के लिए कुल 09 बाढ़ राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई केंद्रों का चयन कर लिया गया है (दुर्गावती में 04, रामगढ़ में 03, नुऑव में 01 और भगवानपुर में 01), जहां पेयजल, शौचालय और बिजली की पुख्ता व्यवस्था है।

जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (DEOC) को चौबीसों घंटे (24×7) के तर्ज पर सक्रिय कर दिया गया है. आम जनता किसी भी सहायता या सूचना के लिए दूरभाष संख्या: 06189-222080 या WhatsApp नंबर: 8544413501 पर संपर्क कर सकती है।जिला में आपात स्थिति से निपटने के लिए 19 प्रशिक्षित गोताखोर और 29 लाइफ जैकेट पूरी तरह तैयार हैं।भीषण गर्मी, लू (Heat Wave) एवं पेयजल प्रबंधन:लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा भीषण गर्मी को देखते हुए जिले के 11 प्रखंडों में चापाकल मरम्मत हेतु 12 विशेष दल (Repairing Teams) लगाए गए हैं। अब तक कुल 2191 लक्षित चापाकलों में से 1483 चापाकलों की साधारण मरम्मत पूरी कर ली गई है। पेयजल संबंधी शिकायतों के लिए प्रमंडलीय कार्यालय में नियंत्रण कक्ष कार्यरत है, जिसका हेल्पलाइन नंबर 06189-223445 है।जिले के सुदूर एवं पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों (जैसे अधौरा बाजार, चटनिया टोला, ओखड़गड़ा, कुदरा आदि) में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में 07 टैंकरों का नियमित परिचालन किया जा रहा है।

गर्मी और लू से बचाव के लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 185 प्रकार की, सदर अस्पताल भभुआ में 338 प्रकार की तथा जिला भंडार में 153 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं (ORS, ब्लीचिंग पाउडर, आई.वी. फ्लूइड्स आदि) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एम्बुलेंस सेवा को अलर्ट मोड पर रखा गया है।सुखाड़ जैसी संभावित स्थिति से निपटने के लिए मनरेगा के तहत तालाबों, आहरों और पियनों के निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। मजदूरों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए कार्य की अवधि सुबह 06:00 से 11:00 बजे और शाम 03:30 से 06:30 बजे तक निर्धारित की गई है तथा कार्यस्थल पर पेयजल, छाया और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।मानसून में देरी होने की स्थिति के लिए कृषि विभाग द्वारा कम अवधि की आकस्मिक फसलों (जैसे- उड़द, मूंग, तिल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तोरिया आदि) के वितरण की मुकम्मल तैयारी कर ली गई है।जल संसाधन विभाग द्वारा कर्मनाशा मुख्य नहर, भभुआ ब्लॉक के सोनहन, महुअत, मोकरी और भगवानपुर ब्लॉक के पहरिया, कसेर आदि क्षेत्रों में नहरों व लघु नहरों की गाद एवं जंगल सफाई (Restoration/Renovation) का कार्य तेजी से शुरू करा दिया गया है ताकि सिंचाई के लिए पानी अंतिम छोर तक पहुंच सके।जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जिले के किसानों, आम नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!