
526वां सालाना उर्स-ए-पाक अकीदत व एहतराम के साथ संपन्न, जायरीन की उमड़ी भारी भीड़
चैनपुर (कैमूर)। कैमूर जिले के चैनपुर स्थित मशहूर सूफी बुजुर्ग हज़रत अब्दुल वाहिद चिश्ती बयाबानी रहमतुल्लाह अलैह (मख़दूम साहब) का 526वां सालाना उर्स-ए-पाक आज बड़े ही अकीदत, मोहब्बत और एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स के मौके पर दूर-दराज़ इलाकों से हजारों की तादाद में जायरीन, मुरीदीन और अकीदतमंदों ने दरगाह शरीफ पर हाज़िरी देकर फातिहा पढ़ी और मुल्क व कौम की खुशहाली, अमन-ओ-सुकून तथा तरक्की के लिए दुआएं मांगीं।उर्स-ए-पाक का एहतेमाम काज़ी अमानुल्लाह फारूकी (खुर्रम मियां) की ज़ेरे-सरपरस्ती में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन-ए-पाक की तिलावत और नात-ओ-मनकबत से हुई। इसके बाद दरगाह शरीफ पर चादरपोशी, गुलपोशी और फातिहाख्वानी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।उर्स के मौके पर उलमा-ए-किराम और मशाइख-ए-इज़ाम ने हज़रत मख़दूम साहब की तालीमात, उनकी सूफियाना खिदमात और इंसानियत के लिए किए गए कामों पर रोशनी डाली। वक्ताओं ने कहा कि हज़रत अब्दुल वाहिद चिश्ती बयाबानी रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी पूरी जिंदगी अमन, भाईचारा, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देने में गुज़ारी। उनकी तालीमात आज भी समाज को सही राह दिखाने का काम कर रही हैं।उर्स के दौरान महफिल-ए-जिक्र, दुरूद-ओ-सलाम और खास दुआ का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। दरगाह परिसर में जायरीन के लिए लंगर और नियाज़ का भी इंतजाम किया गया था।
अकीदतमंदों ने बड़े एहतराम के साथ लंगर में हिस्सा लिया और बुजुर्ग की बारगाह में अपनी अकीदत पेश की।पूरे कार्यक्रम के दौरान दरगाह परिसर में रूहानी माहौल कायम रहा। उर्स को लेकर स्थानीय लोगों और कमेटी के सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। इंतजामिया कमेटी की ओर से सुरक्षा, साफ-सफाई और जायरीन की सहूलियत के लिए बेहतर इंतजाम किए गए थे।उर्स के आखिर में मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और इंसानी भाईचारे की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। क्षेत्र के गणमान्य लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में अकीदतमंदों की मौजूदगी ने उर्स-ए-पाक की रौनक को और बढ़ा दिया।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
