
रोपनी पर संकट, आसमान की ओर टकटकी लगाए किसान डैम खालीभभुआ/चैनपुर (कैमूर), 19 जुलाई।
कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित जगदहवा डैम में जलस्तर काफी कम होने के कारण डैम के फटका से पानी का बहाव पूरी तरह बंद हो गया है। इसका सीधा असर आसपास के गांवों के किसानों पर पड़ रहा है। धान की रोपनी का महत्वपूर्ण समय चल रहा है, लेकिन सिंचाई के लिए खेतों तक पानी नहीं पहुंचने से किसान भारी चिंता में हैं और उनकी उम्मीदें अब केवल बारिश पर टिकी हुई हैं।क्षेत्र के अधिकांश किसान धान की खेती के लिए डैम और मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हैं। इस वर्ष समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने और डैम में पानी का भंडारण कम रहने के कारण खेत सूखे पड़े हैं।
सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं होने से कई किसानों ने अब तक रोपनी शुरू नहीं की है, जबकि जिन किसानों ने नर्सरी तैयार कर ली है, वे भी खेतों में पानी के अभाव में रोपनी नहीं कर पा रहे हैं।स्थानीय किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मोहम्मद इजहार, गिरीश राय, अभय पासवान और राजू राम ने बताया कि हर वर्ष रोपनी के मौसम में जगदहवा डैम से फटका खोलकर पानी छोड़ा जाता था, जिससे आसपास के सैकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई होती थी। लेकिन इस बार डैम में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण फटका से एक बूंद भी पानी नहीं गिर रहा है। इससे किसानों के सामने गंभीर कृषि संकट उत्पन्न हो गया है।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई या सिंचाई की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो धान की रोपनी प्रभावित होगी और इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। कई किसानों ने बताया कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और फसल खराब होने की स्थिति में परिवार का भरण-पोषण भी कठिन हो जाएगा।ग्रामीणों ने प्रशासन एवं सिंचाई विभाग से मांग की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था की जाए।
साथ ही डैम में उपलब्ध पानी के समुचित प्रबंधन एवं अन्य सिंचाई संसाधनों का उपयोग कर किसानों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि समय रहते धान की रोपनी पूरी हो सके और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।फिलहाल जगदहवा डैम का सूखा फटका किसानों की चिंता बढ़ा रहा है और क्षेत्र के किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई, तो क्षेत्र में खरीफ खेती पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
