कैमूर का सबसे बड़ा पैक्स धान घोटाला!पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक पर गंभीर आरोप

चैनपुर (कैमूर)। कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत मेढ़ पैक्स में सरकारी धान अधिप्राप्ति से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। सहकारिता विभाग ने पैक्स के गोदाम से 2966.25 क्विंटल धान गायब होने के मामले में पूर्व पैक्स अध्यक्ष लाल बहादुर बिन्द एवं प्रबंधक साधु सिंह के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

गायब धान का मूल्य लगभग 71.01 लाख रुपये आंका गया है।वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी एवं तत्कालीन प्रशासक मो. दानिश अख्तर मलिक ने चैनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन देकर बताया है कि जिला सहकारिता पदाधिकारी, कैमूर के आदेश के आलोक में यह कार्रवाई की जा रही है।आवेदन के अनुसार, अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 में 15 नवंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 के बीच मेढ़ पैक्स की तत्कालीन प्रबंध समिति ने 49 किसानों से कुल 4233 क्विंटल धान की खरीद की थी। यह धान मेढ़ पंचायत स्थित दो सरकारी तथा एक निजी गोदाम में सुरक्षित रखा गया था।

बताया गया है कि 15 फरवरी 2026 को पैक्स की प्रबंध समिति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव होने तक मो. दानिश अख्तर मलिक को प्रशासक नियुक्त किया गया था। प्रशासक के रूप में 2 मार्च 2026 को पैक्स प्रबंधक साधु सिंह से लिखित रूप में यह जानकारी प्राप्त की गई थी कि ऑनलाइन पोर्टल के अनुसार 2966.25 क्विंटल धान गोदाम में सुरक्षित रखा गया है तथा उसकी अभिरक्षा प्रबंधक के पास है। प्रबंधक ने यह भी लिखित रूप से स्वीकार किया था कि पैक्स की सभी परिसंपत्तियां और अभिलेख उसके संरक्षण में हैं।आवेदन में कहा गया है कि चुनाव सम्पन्न होने के बाद नई प्रबंध समिति का गठन हो गया, लेकिन पूर्व प्रबंध समिति की जिम्मेदारी थी कि शेष धान की मिलिंग कराकर बिहार राज्य खाद्य निगम को चावल उपलब्ध कराए। इसके बावजूद कई बार व्यक्तिगत संपर्क, मोबाइल फोन और विभागीय पत्राचार के माध्यम से पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंधक को चावल आपूर्ति के लिए कहा गया, लेकिन दोनों लगातार टालमटोल करते रहे।सहकारिता विभाग के अनुसार गोदाम का कई बार भौतिक सत्यापन कराने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रबंधक ने कभी गोदाम की चाबी पूर्व अध्यक्ष के पास होने का हवाला दिया तो कभी धान सुरक्षित होने का दावा किया।

इस बीच स्थानीय लोगों से यह सूचना भी मिलती रही कि गोदाम से समय-समय पर धान निकाला जा रहा है।आखिरकार 10 जून 2026 को सरकारी गोदाम का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन धान की मात्रा शून्य पाई गई। अन्य दो गोदामों का सत्यापन नहीं हो सका, किंतु प्रबंधक ने स्वयं वहां भी धान नहीं होने की बात स्वीकार की।इसके बाद सहकारिता विभाग ने पूर्व प्रबंध समिति से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन निर्धारित अवधि तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी ने जिला सहकारिता पदाधिकारी को विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंधक के विरुद्ध धान गबन का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की।जिला सहकारिता पदाधिकारी ने भी दोनों से कई बार संपर्क कर 31 जुलाई 2026 तक शेष चावल की आपूर्ति करने का अवसर दिया, लेकिन कोई प्रगति नहीं होने पर 25 जुलाई 2026 को चैनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश जारी किया।

आवेदन में कहा गया है कि भौतिक सत्यापन से स्पष्ट होता है कि 2966.25 क्विंटल धान, जिसकी अनुमानित कीमत 71,01,202.50 रुपये है, का गबन कर लिया गया है। विभाग का कहना है कि पैक्स के धान की अभिरक्षा पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंधक के पास थी, इसलिए इसके गायब होने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर बनती है।सहकारिता विभाग ने चैनपुर थाना से पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर बिन्द एवं प्रबंधक साधु सिंह के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 316, 316(5), 318(4) सहित अन्य सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आपराधिक धोखाधड़ी, विश्वास का आपराधिक हनन, वित्तीय गबन, सरकारी खाद्यान्न के विचलन, अभिलेखीय जालसाजी तथा सरकारी योजना को विफल करने के प्रयास के आरोपों की जांच करने का अनुरोध किया है।हालांकि, इस मामले में आरोपित पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंधक का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आगे की जांच की जाएगी।

( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)

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