
नल-जल योजना के पंप ऑपरेटरों के भुगतान पर उठे सवाल, वर्षों से मानदेय के इंतजार में कर्मी
चैनपुर प्रखंड की पंचायतों में कार्यरत पंप ऑपरेटरों की परेशानी बढ़ी, ठेकेदार और विभाग के बीच भुगतान को लेकर फंसा मामला
चैनपुर (कैमूर)। चैनपुर प्रखंड अंतर्गत विभिन्न पंचायतों के वार्डों में हर घर तक नल के माध्यम से पानी पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित नल-जल योजना के पंप ऑपरेटर इन दिनों भुगतान की समस्या से जूझ रहे हैं। पंप ऑपरेटरों का आरोप है कि वे नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल पा रहा है। कई ऑपरेटरों का कहना है कि पिछले तीन से पांच वर्षों के दौरान उन्हें भुगतान के नाम पर कभी-कभार ही राशि मिल पाई है।पंप ऑपरेटरों के अनुसार, नल-जल योजना के तहत उन्हें गांव के वार्डों में लगे पंप एवं जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है।
निर्धारित समय पर मोटर चलाना, पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना और छोटी-मोटी तकनीकी समस्या की जानकारी संबंधित लोगों तक पहुंचाना उनके कार्यों में शामिल है। इसके बावजूद उन्हें उनके काम के अनुरूप नियमित भुगतान नहीं मिल रहा है।ठेकेदार और विभाग के बीच फंसे ऑपरेटरपंप ऑपरेटरों की सबसे बड़ी शिकायत भुगतान को लेकर है। उनका कहना है कि जब वे अपनी ड्यूटी नियमित रूप से कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर भुगतान मिलना चाहिए। लेकिन भुगतान की मांग करने पर ठेकेदार की ओर से यह कहा जाता है कि विभाग से मेंटेनेंस की राशि प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए भुगतान नहीं किया जा सकता।वहीं, विभाग से संपर्क करने पर पंप ऑपरेटरों को यह जवाब मिलने की बात कही जा रही है कि भुगतान की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है। ऐसे में पंप ऑपरेटर खुद को ठेकेदार और विभाग के बीच फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ऑपरेटरों का कहना है कि जब नल-जल योजना में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी आती है तो कई बार विभागीय स्तर से ही मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्य कराए जाते हैं। उनका आरोप है कि जिन ठेकेदारों को योजना के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है, वे समस्या आने पर मौके पर नजर नहीं आते। ऐसे में नियमित रूप से गांव में मौजूद रहकर जलापूर्ति व्यवस्था संभालने वाले पंप ऑपरेटरों पर ही काम का दबाव बना रहता है।महंगाई के दौर में दो हजार रुपये मानदेय पर भी सवालपंप ऑपरेटरों ने सरकार द्वारा निर्धारित किए गए करीब दो हजार रुपये प्रतिमाह के मानदेय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आज के महंगाई के दौर में दो हजार रुपये प्रतिमाह की राशि बेहद कम है। इसके बावजूद यदि यही राशि भी नियमित रूप से नहीं मिले तो परिवार चलाना और भी मुश्किल हो जाता है।
ऑपरेटरों का कहना है कि वे बेरोजगारी के दौर में इस उम्मीद के साथ काम कर रहे हैं कि कम से कम उन्हें नियमित आमदनी होती रहेगी। लेकिन कई वर्षों से भुगतान में अनियमितता के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई ऑपरेटरों के परिवारों की आर्थिक स्थिति दयनीय बताई जा रही है।परिवार चलाना हो रहा मुश्किलपंप ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें अपने काम के बदले मिलने वाली मामूली राशि पर ही भरोसा रहता है। परिवार की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा का खर्च और अन्य आवश्यकताओं के बीच जब महीनों तक भुगतान नहीं मिलता तो आर्थिक परेशानी बढ़ती जाती है।ऑपरेटरों का कहना है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं में मजदूरों एवं कामगारों के लिए मजदूरी की राशि निर्धारित की जाती है। ऐसे में नल-जल योजना जैसी महत्वपूर्ण जनहितकारी योजना में जिम्मेदारी निभाने वाले पंप ऑपरेटरों को महज दो हजार रुपये प्रतिमाह देने की व्यवस्था और उसमें भी अनियमित भुगतान पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
कागजों के बजाय जमीन पर व्यवस्था मजबूत करने की मांगपंप ऑपरेटरों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए पंप ऑपरेटरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि ऑपरेटरों को समय पर मानदेय नहीं मिलेगा तो उनके सामने आर्थिक संकट बना रहेगा और इसका असर योजना के संचालन पर भी पड़ सकता है।उन्होंने मांग की है कि लंबित मानदेय का जल्द भुगतान कराया जाए, भविष्य में भुगतान की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और ठेकेदार एवं विभाग के बीच जिम्मेदारी को स्पष्ट किया जाए, ताकि ऑपरेटरों को भुगतान के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।अब देखना यह है कि नल-जल योजना के तहत वर्षों से भुगतान की समस्या झेल रहे पंप ऑपरेटरों की आवाज प्रशासन और संबंधित विभाग तक कब पहुंचती है और उनके लंबित मानदेय के भुगतान को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
