
मंडल कारा का निरीक्षण कर बंदियों के विधिक अधिकारों और सुविधाओं का लिया जायजा
भभुआ। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (BALSA), पटना के निर्देश एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कैमूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कैमूर की सचिव डॉ. शैल ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को मंडल कारा, भभुआ का भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ-साथ बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही विधिक सुविधाओं की जानकारी ली।निरीक्षण के क्रम में सचिव डॉ. शैल ने विशेष रूप से विचाराधीन बंदियों से बातचीत की और यह जानकारी प्राप्त की कि उन्हें अपने मामलों में कानूनी प्रतिनिधित्व की सुविधा मिल रही है या नहीं।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता उपलब्ध नहीं हैं और जो निःशुल्क विधिक सहायता के पात्र हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से पैनल अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाए, ताकि आर्थिक कठिनाई के कारण कोई भी व्यक्ति न्यायिक सहायता से वंचित न रहे।इसके अलावा कारा परिसर में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सचिव ने जेल परिसर की साफ-सफाई, पेयजल की उपलब्धता, रसोईघर में तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता तथा बंदियों के स्वास्थ्य को लेकर जेल अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए आवश्यक सुधार और नियमित निगरानी पर जोर दिया।निरीक्षण के दौरान महिला वार्ड का भी भ्रमण किया गया। सचिव डॉ. शैल ने महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली तथा उनके स्वास्थ्य, आवश्यक सुविधाओं और अन्य जरूरतों की समीक्षा की। महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य एवं उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में भी जानकारी ली गई और आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए सचिव ने जमानत के प्रावधानों, प्ली बार्गेनिंग (Plea Bargaining) तथा विधिक सहायता क्लिनिक की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बंदियों को बताया कि पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। साथ ही आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में भी बंदियों को जानकारी दी गई और उन्हें इसके माध्यम से मामलों के समाधान की संभावनाओं से अवगत कराया गया।सचिव डॉ. शैल ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि ऐसे योग्य, जरूरतमंद एवं असहाय बंदियों की सूची नियमित रूप से जिला विधिक सेवा प्राधिकार को उपलब्ध कराई जाए, ताकि पात्र बंदियों को समय पर विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि आर्थिक या अन्य किसी कारण से कोई भी पात्र बंदी न्याय पाने के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।निरीक्षण के अवसर पर मंडल कारा के अधीक्षक, संबंधित जेल अधिकारी एवं कर्मी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पराविधिक स्वयंसेवक (PLVs) मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान विधिक सहायता के साथ-साथ बंदियों के लिए उपलब्ध बुनियादी, स्वास्थ्य एवं मानवीय सुविधाओं की नियमित समीक्षा और आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
