
औद्योगिक गलियारे के विरोध में मोरवा में ग्रामीणों की बैठक, जमीन नहीं देने का लिया संकल्प
चांद (कैमूर)। कैमूर जिले के चांद प्रखंड अंतर्गत ग्राम मोरवा में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे को लेकर ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने भाग लिया और प्रस्तावित परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी आपत्तियां एवं चिंताएं सामने रखीं। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी जमीन उनके जीवन-यापन और परिवार के भविष्य का मुख्य आधार है, इसलिए वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन सरकार को देने के लिए तैयार नहीं हैं।बैठक के दौरान ग्रामीणों ने बारी-बारी से अपनी बातें रखीं। लोगों का कहना था कि खेती योग्य जमीन से ही उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है।
जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका, सामाजिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सहारा है। ऐसे में जमीन के अधिग्रहण से उनके सामने रोजगार और जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।ग्रामीणों ने कहा कि “जमीन नहीं तो किसान नहीं, और यही जमीन हमारे जीने का सहारा है।” उनका कहना था कि यदि औद्योगिक गलियारे के लिए उनकी जमीन ली जाती है तो इसका सीधा असर किसानों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। कई ग्रामीणों ने अपनी जमीन को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि इसे छोड़ना उनके लिए आसान नहीं है।
बैठक में ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि औद्योगिक गलियारे से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की जाए। ग्रामीणों की सहमति और उनकी समस्याओं को समझे बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।लोगों ने यह भी कहा कि यदि विकास परियोजना के नाम पर जमीन ली जाती है तो किसानों के हितों, उनकी आजीविका और भविष्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से पारदर्शी तरीके से पूरी जानकारी उपलब्ध कराने तथा जमीन अधिग्रहण से जुड़े सभी पहलुओं पर स्थानीय लोगों के साथ चर्चा करने की मांग की।बैठक में मौजूद लोगों ने एकजुट होकर कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास की कीमत किसानों की जमीन और उनकी आजीविका छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। बैठक के अंत में ग्रामीणों ने अपनी जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया।फिलहाल मोरवा गांव में औद्योगिक गलियारे को लेकर ग्रामीणों के बीच विरोध का माहौल बना हुआ है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों पर क्या कदम उठाते हैं और प्रस्तावित परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)
